वैश्विक कीमतों में नरमी के बीच CCI से सस्ती बिक रही कपास, धागा बाजार भी सुस्त
जैसे-जैसे ICE पर कपास वायदा कीमतों में नरमी आ रही है, घरेलू री-सेलर्स और मल्टीनेशनल कंपनियों ने कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) की तय कीमतों से कम दरों पर कपास बेचना शुरू कर दिया है। यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है, जब घरेलू और वैश्विक मांग अब भी कमजोर बनी हुई है।
फरवरी की शुरुआत से मई के मध्य तक ICE कपास वायदा कीमतों में तेज उछाल देखा गया था। 9 फरवरी को करीब 60.52 सेंट प्रति पाउंड के स्तर से बढ़कर कीमतें 11 मई को 88 सेंट प्रति पाउंड तक पहुंच गई थीं। हालांकि, इसके बाद अमेरिका और ब्राजील में बेहतर मौसम की संभावना, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, मजबूत अमेरिकी डॉलर और वैश्विक मांग को लेकर अनिश्चितताओं के कारण कीमतें घटकर 76-77 सेंट प्रति पाउंड पर आ गईं।
CotYarn Trade Link के आनंद पोपट के अनुसार, वैश्विक वायदा बाजार में नरमी का असर भारतीय हाजिर बाजार में भी दिखाई दिया, लेकिन घरेलू कीमतों में गिरावट सीमित रही। इसकी मुख्य वजह कम आवक, हाजिर बाजार में सीमित उपलब्धता और मजबूत घरेलू आधार स्तर रहे। उन्होंने बताया कि भारतीय कपास अभी भी ICE जुलाई वायदा के मुकाबले लगभग 8.55 सेंट प्रति पाउंड के प्रीमियम पर कारोबार कर रहा है।
CCI ने 2025-26 सीजन में खरीदी गई कपास की बिक्री शुरू की थी। शुरुआत में उसने कीमतें घटाकर करीब ₹54,600 प्रति कैंडी कर दी थीं, लेकिन वैश्विक रुझानों को देखते हुए बाद में इन्हें बढ़ाकर ₹68,600 प्रति कैंडी तक पहुंचाया गया। हालांकि, तकनीकी कारणों से 22 मई से बिक्री रोक दी गई है। CCI ने इस सीजन में करीब 105 लाख गांठ कपास खरीदी थी, जिनमें से लगभग 72 लाख गांठें बिक चुकी हैं, जबकि 33 लाख गांठों का स्टॉक अब भी मौजूद है।
बाजार सूत्रों के मुताबिक, री-सेलर्स और मल्टीनेशनल कंपनियां CCI की सूची कीमत से करीब ₹2,000 प्रति कैंडी कम दर पर माल बेच रही हैं। वहीं, धागे का बाजार भी सुस्त बना हुआ है। मांग कमजोर रहने से धागे की कीमतों में ₹30-35 प्रति किलोग्राम तक की गिरावट दर्ज की गई है।
इस बीच, कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CAI) ने अनुमान जताया है कि आगामी खरीफ सीजन में कपास का रकबा लगभग 7 प्रतिशत बढ़ सकता है। सरकार ने भी 2026-27 सीजन के लिए कपास के MSP में ₹557 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की है।