कपास-तिलहन की बुआई पिछड़ी, अब बारिश पर टिकी किसानों की उम्मीद
खरीफ सीजन में कपास और तिलहन की बुआई 21 अगस्त तक पिछले साल की समान अवधि से थोड़ी पीछे रही है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, कपास की बुआई 108.45 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि सामान्य क्षेत्र 125.51 लाख हेक्टेयर है। पिछले साल यह आंकड़ा 108.73 लाख हेक्टेयर था, यानी इस साल रकबा 0.28 लाख हेक्टेयर कम है।
तिलहन की कुल बुआई 188.38 लाख हेक्टेयर रही, जो 200.08 लाख हेक्टेयर के सामान्य क्षेत्र का 94.15% है। पिछले साल 188.69 लाख हेक्टेयर की तुलना में इसमें 0.31 लाख हेक्टेयर की मामूली कमी आई है।
तिलहन में सबसे अहम सोयाबीन का रकबा 121.35 लाख हेक्टेयर है, जो पिछले साल के 122.76 लाख हेक्टेयर से 1.41 लाख हेक्टेयर कम है। हालांकि मूंगफली, तिल और सूरजमुखी में बढ़ोतरी हुई है। मूंगफली 48.79, तिल 10.81 और सूरजमुखी 1.10 लाख हेक्टेयर तक पहुंचा है। वहीं अरंडी का रकबा घटकर 5.88 लाख हेक्टेयर रह गया।
IMD के अनुसार मध्य भारत में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। पश्चिमी मध्य प्रदेश में व्यापक बारिश और पूर्वी मध्य प्रदेश व छत्तीसगढ़ में अगले कुछ दिनों तक बारिश की गतिविधियां बनी रह सकती हैं। बारिश से खेतों में नमी को फायदा मिलेगा, लेकिन भारी बारिश वाले इलाकों में जलभराव और जलनिकासी किसानों के लिए चुनौती बन सकती है।
आने वाले दिनों में बारिश, फसल की बढ़वार और अंतिम बुआई आंकड़े तय करेंगे कि शुरुआती रकबा कमी का उत्पादन पर कितना असर पड़ता है।
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