CCI ने कपास की बिक्री फिर से शुरू की, कीमतें ₹2,300 प्रति कैंडी घटाईं
कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) ने शुक्रवार को 2025-26 सीजन में खरीदी गई कपास की बिक्री दोबारा शुरू कर दी। वैश्विक बाजार में कीमतों में आई नरमी को देखते हुए संस्था ने कपास के बिक्री मूल्य में ₹2,300 प्रति कैंडी (356 किलोग्राम) की कटौती भी की। इसके बावजूद बाजार से प्रतिक्रिया अपेक्षा के अनुरूप नहीं रही और खरीदारी सीमित स्तर पर ही दिखाई दी।
व्यापारिक सूत्रों के अनुसार, कीमत घटाने के बाद भी CCI शुक्रवार को केवल लगभग 1,200 गांठ कपास ही बेच सका। इनमें से करीब 800 गांठें स्पिनिंग मिलों ने खरीदीं, जबकि शेष मात्रा व्यापारियों और पुनर्विक्रेताओं ने ली। यह हाल के दिनों में दूसरी बार है जब CCI ने कीमतों में कमी की है। इससे पहले पिछले सप्ताह भी संस्था ने ₹700 प्रति कैंडी की कटौती की थी। तकनीकी कारणों का हवाला देते हुए CCI ने 22 मई को अपनी बिक्री अस्थायी रूप से रोक दी थी।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कीमतों में कटौती के बावजूद खरीदार अभी भी सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। रायचूर के सोर्सिंग एजेंट रामानुज दास बूब के अनुसार, मौजूदा स्तर पर भी कीमतों में असंतुलन बना हुआ है। खरीदार “वेट एंड वॉच” की रणनीति अपना रहे हैं, जबकि धागे की कमजोर कीमतें भी मिलों की खरीद क्षमता को प्रभावित कर रही हैं।
वैश्विक कपास बाजार में हालिया नरमी ने CCI को मूल्य संशोधन के लिए मजबूर किया। ICE कपास वायदा कीमतें, जो फरवरी की शुरुआत से बढ़कर 11 मई को 88 सेंट प्रति पाउंड तक पहुंच गई थीं, अब घटकर लगभग 76 सेंट प्रति पाउंड के आसपास आ गई हैं। अमेरिका और ब्राजील में बेहतर मौसम की संभावनाएं तथा कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट इस नरमी के प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। इसी वजह से निजी पुनर्विक्रेता CCI की कीमतों की तुलना में लगभग ₹2,000 प्रति कैंडी कम दर पर कपास बेचते देखे गए।
CCI ने 2025-26 सीजन में लगभग 105 लाख गांठ कपास की खरीद की थी, जिनमें से अधिकांश स्टॉक पहले ही बेचा जा चुका है। अनुमान है कि उसके पास अब लगभग 32 लाख गांठें शेष हैं। वहीं, केंद्र सरकार ने 2026-27 विपणन सत्र के लिए कपास के MSP में ₹557 प्रति क्विंटल की वृद्धि की है। इसके साथ मध्यम स्टेपल कपास का MSP ₹8,267 और लंबे स्टेपल कपास का MSP ₹8,667 प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों और उद्योग संगठनों के आकलन के अनुसार, बेहतर दामों की उम्मीद के चलते आगामी खरीफ सीजन में कपास का रकबा लगभग 7 प्रतिशत बढ़ सकता है।