पिछले खरीफ सीज़न में कपास को मिले बेहतर बाजार भाव के कारण इस वर्ष अमरावती मंडल के किसानों का रुझान कपास की खेती की ओर बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए अमरावती मंडल के पांचों जिलों—अमरावती, अकोला, वाशिम, बुलढाणा और यवतमाल—में कपास उत्पादन बढ़ाने के लिए हाई-डेंसिटी (सघन) कपास खेती को प्रोत्साहित किया जाएगा। मंडलीय कृषि सहसंचालक गणेश घोरपड़े ने बताया कि इस उद्देश्य से केंद्रीय कपास अनुसंधान संस्थान, कृषि विश्वविद्यालयों तथा कृषि विज्ञान केंद्रों के सहयोग से विशेष अभियान चलाया जाएगा।
यह जानकारी मंडलीय आयुक्त (राजस्व) नयना गुंडे की अध्यक्षता में आयोजित खरीफ समीक्षा बैठक में दी गई। बैठक में सभी संबंधित जिलों के जिलाधिकारी और कृषि अधिकारियों ने ऑनलाइन भाग लिया। इस दौरान खरीफ मौसम को सफल बनाने के लिए राजस्व और कृषि विभाग के बीच बेहतर समन्वय के साथ कार्य करने पर जोर दिया गया।
अमरावती मंडल में प्रतिवर्ष औसतन 10 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की खेती की जाती है। कृषि विभाग का अनुमान है कि पिछले सीज़न के अंत में कपास की कीमतों में हुई बढ़ोतरी के कारण इस वर्ष बड़ी संख्या में किसान सोयाबीन के बजाय कपास की खेती को प्राथमिकता दे सकते हैं।
उत्पादन बढ़ाने के लिए कम क्षेत्र में अधिक उपज देने वाली सघन खेती पद्धतियों को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके तहत उन्नत बीजों का उपयोग, संतुलित उर्वरक प्रबंधन, प्रभावी कीट नियंत्रण तथा आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
बैठक में वाशिम जिले द्वारा कृषि क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों की भी चर्चा हुई। जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी आरिफ शाह ने ‘9M’ मॉडल की जानकारी दी, जिसमें मानव संसाधन, प्रेरणा, वित्त, विपणन, निगरानी, प्रबंधन, मशीनरी, पद्धति और सामग्री जैसे नौ प्रमुख घटकों को शामिल किया गया है। इसके माध्यम से स्मार्ट बुवाई तकनीकों को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखा गया है।
पिछले वर्ष आयोजित ‘वत्सगुलाम स्मार्ट बुवाई प्रतियोगिता’ को किसानों का उत्साहजनक प्रतिसाद मिला था। प्रतियोगिता में 32,335 किसानों ने भाग लिया और 1.36 लाख एकड़ से अधिक क्षेत्र में स्मार्ट बुवाई तकनीक अपनाई गई। कृषि विभाग को उम्मीद है कि इस वर्ष भी इस पहल को व्यापक समर्थन मिलेगा।