तेलंगाना के आदिलाबाद में बारिश से खरीफ फसलों को राहत, किसान अब अच्छी बारिश के इंतजार में
By jayesh chouhan 2026-07-23 12:55:05
तेलंगाना के आदिलाबाद में सामान्य बारिश से खरीफ फसलों को संजीवनी, किसानों को अब अच्छी वर्षा का इंतजार
आदिलाबाद (तेलंगाना): पिछले दो दिनों में हुई सामान्य बारिश ने तेलंगाना के आदिलाबाद जिले के किसानों को बड़ी राहत दी है। लंबे समय से बारिश की कमी से जूझ रहे किसानों का कहना है कि इस वर्षा ने कपास, सोयाबीन और अरहर जैसी खरीफ फसलों को सूखने से बचा लिया है। हालांकि, उनका मानना है कि अच्छी पैदावार के लिए अगले 15 दिनों के भीतर पर्याप्त और लगातार बारिश होना बेहद जरूरी है।
आदिलाबाद जिले में कपास प्रमुख नकदी फसल है, जिसकी खेती लगभग 4.30 लाख एकड़ क्षेत्र में की जाती है। इसके अलावा करीब 56,000 एकड़ में सोयाबीन और 42,000 एकड़ में अरहर की बुवाई हुई है। समय पर बुवाई करने वाले किसानों की फसलों को हालिया बारिश से राहत मिली है, लेकिन जिन किसानों ने देर से बुवाई की, उन्हें अभी भी पौधों की धीमी बढ़त और बीजों के कमजोर अंकुरण जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
बारिश के आंकड़े बताते हैं कि पुराने आदिलाबाद जिले के अधिकांश हिस्सों में अब भी सामान्य से कम वर्षा हुई है। 1 जून से 22 जुलाई के बीच कोमाराम भीम आसिफाबाद जिले में 432 मिमी सामान्य वर्षा के मुकाबले 353 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जो 18 प्रतिशत कम है। मंचरियल में 380.4 मिमी के मुकाबले 305.7 मिमी (-20%), आदिलाबाद में 432.2 मिमी के मुकाबले 279.2 मिमी (-36%) और निर्मल में 380.8 मिमी के मुकाबले 280.2 मिमी (-26%) वर्षा रिकॉर्ड की गई। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि जिले के अधिकांश क्षेत्रों में वर्षा की कमी बनी हुई है।
आदिलाबाद ग्रामीण मंडल के चिंतागुडा गांव के किसान सेडमाकी प्रभु ने बताया कि पिछले दो दिनों की बारिश फसलों के लिए जीवनदायिनी साबित हुई है। उन्होंने कहा कि इससे कपास और सोयाबीन के पौधे बच गए हैं, लेकिन उनकी बेहतर बढ़वार के लिए आने वाले दिनों में अच्छी बारिश जरूरी है। यदि जल्द पर्याप्त वर्षा नहीं हुई, तो उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
कम बारिश का असर केवल खेती तक सीमित नहीं है। सूखे जैसी स्थिति के कारण गांवों में हरी घास की कमी हो गई है, जिससे पशुपालकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। बकरियां, भेड़ें और गायों को चराने के लिए ग्रामीण जंगलों के किनारों तक ले जाने को मजबूर हैं। प्रभु के अनुसार, पड़ोसी गांव कोथुर में करीब 500 मवेशी हैं, जहां पीने के पानी और हरे चारे की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है।
किसानों का कहना है कि हालिया बारिश ने उम्मीद जरूर जगाई है, लेकिन खरीफ सीजन की सफलता अब आने वाले दिनों में होने वाली वर्षा पर निर्भर करेगी। यदि पर्याप्त बारिश होती है, तो फसलों की बढ़वार बेहतर होगी और किसानों के साथ-साथ पशुपालकों को भी राहत मिलेगी।