हरियाणा में कपास उत्पादन 20 साल के निचले स्तर पर

By abhishek junwal 2023-06-29 19:05:22
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हरियाणा में 20 साल में सबसे कम कपास पैदावार, BT कपास भी कीट और मौसम के आगे बेअसर


चंडीगढ़: हरियाणा में 2022-23 सीजन के दौरान कपास की पैदावार दो दशकों के निचले स्तर पर पहुंच गई है। यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब राज्य में बड़े पैमाने पर ‘कीट-प्रतिरोधी’ मानी जाने वाली BT कपास की खेती की जा रही है।


विशेषज्ञों के अनुसार, पिंक बॉलवर्म, व्हाइटफ्लाई और थ्रिप्स जैसे कीटों के हमले, साथ ही लीफ कर्ल और पैराविल्ट जैसी बीमारियों ने फसल को भारी नुकसान पहुंचाया। इसके अलावा, शुरुआती दौर में अत्यधिक गर्मी और बाद में सितंबर में हुई बेमौसम बारिश ने भी पैदावार को प्रभावित किया।


उपज में भारी गिरावट
राज्य में कपास की औसत उत्पादकता घटकर 295.65 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रह गई, जो 2013-14 के 761.19 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की तुलना में करीब 39% है। यह स्तर 2002-03 के बाद सबसे कम है।


BT कपास की सीमाएं उजागर
विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान में इस्तेमाल हो रही BG-2 (BT) कपास केवल कुछ चुनिंदा कीटों से ही सुरक्षा देती है, जबकि कपास पर हमला करने वाले 1,300 से अधिक प्रकार के कीट मौजूद हैं। ऐसे में फसल अभी भी कई तरह के कीटों के लिए संवेदनशील बनी हुई है।

मौसम और कीटों की दोहरी मार
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, शुरुआती गर्मी के कारण पौधे झुलस गए, जिससे पौधों की संख्या कम हुई। इसके बाद सितंबर में भारी बारिश और जलभराव से पैराविल्ट की समस्या बढ़ी, जिससे फसल को और नुकसान हुआ।


किसानों को आर्थिक झटका
किसानों का कहना है कि औसत पैदावार घटकर 5 क्विंटल प्रति एकड़ से भी कम रह गई है, जबकि लागत निकालने के लिए कम से कम 8 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन जरूरी है। मौजूदा कीमतों पर उन्हें नुकसान झेलना पड़ रहा है।


कपास रकबा और स्थिति
हरियाणा में कपास और धान प्रमुख खरीफ फसलें हैं। 2023-24 में राज्य ने करीब 7 लाख हेक्टेयर में कपास बुवाई का लक्ष्य रखा था, लेकिन अब तक करीब 6.27 लाख हेक्टेयर में ही बुवाई हो सकी है।



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