तेलंगाना में 66% सर्वेक्षित किसान कर रहे HTBt कपास के बीजों का इस्तेमाल, अध्ययन में खुलासा
हैदराबाद, तेलंगाना: तेलंगाना में हर्बिसाइड-टॉलरेंट बीटी (HTBt) कपास के बीजों का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर हो रहा है। एक अध्ययन के अनुसार, राज्य में सर्वेक्षण में शामिल लगभग 66 प्रतिशत किसान इन बीजों का उपयोग कर रहे हैं। हालांकि, भारत में HTBt कपास की व्यावसायिक खेती को अभी तक आधिकारिक मंजूरी नहीं मिली है।
साउथ एशिया बायोटेक्नोलॉजी सेंटर (SABC) ने फेडरेशन ऑफ सीड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (FSII) और नेशनल सीड एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NSAI) के सहयोग से यह अध्ययन किया है। इसमें HTBt कपास की अनधिकृत खेती, इसके विस्तार और संभावित प्रभावों का विश्लेषण किया गया है।
देश में HTBt कपास का बढ़ता रकबा
अध्ययन के अनुसार, देश में कपास की खेती के कुल क्षेत्रफल के लगभग 24 से 30 प्रतिशत हिस्से में HTBt कपास की खेती होने का अनुमान है। इसके अनधिकृत बीज बाजार का मूल्य लगभग 820 से 880 करोड़ रुपये आंका गया है।
अध्ययन में जांचे गए 98.2 प्रतिशत नमूनों में कम से कम एक आनुवंशिक रूप से संशोधित (GM) गुण पाया गया। वहीं, 72.7 प्रतिशत नमूनों में ग्लाइफोसेट सहनशीलता से संबंधित CP4EPSPS प्रोटीन और 53.7 प्रतिशत नमूनों में कीट प्रतिरोध से संबंधित Vip3A प्रोटीन की मौजूदगी दर्ज की गई।
खरपतवार नियंत्रण पर खर्च में बचत
मजदूरों की कमी और खरपतवार नियंत्रण की बढ़ती लागत के कारण किसान HTBt कपास की ओर आकर्षित हो रहे हैं। सर्वेक्षण में शामिल कई किसानों ने खरपतवार नियंत्रण के खर्च में 60 से 80 प्रतिशत तक बचत होने की जानकारी दी।
हालांकि, कृषि वैज्ञानिक जी.वी. रामंजनेयुलु के अनुसार, हर्बिसाइड सहनशीलता सीधे तौर पर पैदावार बढ़ाने वाला गुण नहीं है।
विशेषज्ञों ने ग्लाइफोसेट के संभावित स्वास्थ्य और पर्यावरणीय जोखिमों पर चिंता जताई है। उन्होंने HTBt कपास को मंजूरी देने से पहले स्वतंत्र वैज्ञानिक मूल्यांकन, बीज आपूर्ति की निगरानी और किसानों के लिए सुरक्षित विकल्प सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई है।